एक नाग एक मस्जिद के अंदर बिल में रहता था प्रतिदिन 06बार नमाज सुनता था प्रतिदिन की तकरीर भी ध्यान लगाकर सुनता रहता था एक दिन उसका मन हुआ नमाज की इतनी महिमा है तो नमाज मैं भी पढ़ लेता हूं शायद मुझे भी जन्नत मिल जाए, नाग एक दिन ठीक नमाज के समय बाहर निकल नमाजियों की लाइन में लगने चल पड़ा
नमाजियों ने नाग देखा तो लाठी डंडे लेकर दौड़ा लिया अब नाग आगे-आगे नमाजी पीछे लाठी पत्थर लेकर, भागते-भागते नाग को एक पुराना सा मन्दिर दिख गया बेचारा वहीं घुसकर शिवलिंग से लिपट गया जान भी बच गई
हिंदुओं ने जब शिवलिंग पर लिपटा नाग देखा तो शोर मच गया भीड़ जमा हो गई
आरती पूजा शुरू हो गई हिंदु दूध पिलाने जुट गए
नाग सोच रहा था कि मैं पहले कहां फंसा पड़ा था मैं तो नमाज पढ़ना चाहता था मुस्लिम तो मुझे जान से मारने जुट गए थे यहां तो सनातनी शिव मंदिर की शरण में दो घड़ी क्या आया यहां तो स्वयं नाग से शेषनाग बन गया
यही अन्तर है इस्लाम और सनातन में नाग के हांथ पैर केवल नाग को दिखते हैं
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